मन के हैं सौ मसले.....
मन के हैं सौ मसले, पर मसला कुछ भी नहीं, किस्से तो बहुत हैं मगर कहना कुछ भी नहीं। कुछ शोर है भीतर, जो सुनाई नहीं देता, कुछ दर्द है ऐसा, जो दिखाई नहीं देता। सब हासिल है फिर भी कुछ अधूरा सा लगता है, ये कैसा सुकून है जो अक्सर बेचैन रखता है। कुछ फैसले वक्त पर छोड़े, कुछ हालात पर, कुछ सवाल खुद से हैं, कुछ इस कायनात पर। न किसी से उम्मीद है, न कोई शिकायत रही, जो जिंदगी से मिली, बस वही इनायत रही। न अब किसी से गिला है, न कोई शिकायत है, खामोशी से जीने की बस एक आदत है। सब पूछते हैं हाल, तो हँसकर कह देते हैं, सब ठीक है जनाब, बस थोड़ी सी थकावट है। 🖋️शिवम