थोड़ा और....

 थोड़ा और वक़्त बिताना था तुम्हारे साथ,

थोड़ी और बातें करनी थी,

थोड़ा लड़ाइयाँ लड़नी थी तुम्हारे साथ,

थोड़ा प्यार जताना था...

थोड़ा और तुम्हें सताना था,

थोड़ा और तुम्हें मनाना था,

थोड़े और किस्से सुनाने थे,

थोड़ा तुम्हें और सुनना था,

थोड़ा और तुम्हें बेवजह हँसाना था,

तो थोड़ा कभी यूँ ही मुस्कुराना था...

थोड़ी शामें और साथ बितानी थीं,

थोड़े और रास्ते साथ चलने थे,

थोड़ा साथ और घूमना था....

थोड़ी और यादें साथ बनानी थी

थोड़ा और... खैर


🖋️शिवम

Comments

Popular posts from this blog

सड़क पर चलते हुए आसमान तक

*टहलते-टहलते*

चाय और मैं