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राधे कृष्ण

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कृष्ण के कई रूप थे...चाहे वो नटखट बालगोपाल हों, माखनचोर हों, मुरलीधर हों, गिरधारी हों, कंस के काल हों, कुरुक्षेत्र में अर्जुन के सारथी हों या फिर गीता के उपदेशक... कृष्ण के बगल में चाहे हमेशा रुक्मणि और सत्यभामा रहीं हों, उनके हृदय में सिर्फ राधा ही बसती हैं...इसीलिए तो जब उद्धव जी जब विद्या को सर्वश्रेष्ठ बता रहे थे और अध्यात्म के गीत गा रहे थे कृष्ण के सामने, तब कृष्ण उन्हें प्रेम समझाने का प्रयास कर रहे थे, और बोले कि 'मोहे बृज बिसरत नाहीं उद्धव भैया'... जब उद्धव जी ने कृष्ण के नेत्रों से झरते हुए आंसू देखे, और पूछा कि ऐसा क्या है खास है प्रेम में; तो कृष्ण ने क्या कहा मालूम नहीं, लेकिन एक गीत है जो शायद कृष्ण का जवाब हो: "ये तो प्रेम की बात है ऊधौ, बंदगी इतनी सस्ती नहीं है... यहाँ दम-दम में होती है पूजा, लौ लगाने की फुर्सत नहीं है" आप में से कइयों ने सुना होगा, जिन्होंने नही सुना; वो कम से कम एक बार जरूर सुनें. आज एक बात महसूस की कान्हा अपने भक्त को कब निराश नही देख सकते. राधा के बिना कृष्ण का कोई मोल नहीं हैं, और राधे-कृष्ण में ही सम्पूर्ण संसार का सार है जो सिर्...

#दिन_ढ़लते_ही

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ये हमें आज डाक द्वारा प्राप्त हुआ. ये दो पेंटिंग्स मेरे लिए बड़े ही प्रेम और स्नेह से बनाई गई हैं. जिन्हें देखकर मुझे बेहद खुशी का अनुभव हो रहा हैं. इन्हें भेजा हैं हमारी शिक्षिका श्रीमती विजयता जादौन की सहकर्मी श्रीमती सुजाता मैम ने हैदराबाद से. आज सुबह सुबह पोस्टमैन भाईसाहब हमें देकर गए..जब से मुझे मालूम हुआ कि ये आने वाला है डाक से तब से ही बेहद उत्साहित और जिज्ञासा हो रही थी आखिर क्या होगा. आज सुबह जैसे ही मिला सारे काम छोड़कर बड़े ही उत्साह से पोस्टमैन के पेपर पर हस्ताक्षर किए और उन्हें सहृदय धन्यवाद कहा और बड़े ही नाजुक और तहरीर से खोला...जैसे जैसे टेप और पैकिंग खुल रही थी उतना ही मैं जिज्ञासा से और भरता जा रहा था.. इन्हें देखकर बहुत ही खुशी हुई और अच्छा भी लगा कि मेरे काम को सराहा गया और उन्होंने न केवल सराहा बल्कि अपने प्रेम से परिपूर्ण मुझे डाक भेजी. इसमें विशेष बात यह है कि मैं और आदर्णीय मैम जिनसे न कभी मुलाक़ात हुई और न ही बात. यह उपहार सदैव मुझे याद रहेगा. मैं इससे ज़्यादा और कुछ नहीं कह पाउँगा, मुझे जो आज महसूस हुआ वह इसके जरिये आपके साथ साँझा कर रहा हूँ मैं श्रीमती विजयता एवं ...

बारिश और भुट्टे का साथ

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आज शाम को मित्र के साथ था. वहाँ भुटिया(भुट्टा) वाला खड़ा था और साथ में हल्की हल्की बारिश की फुन्हार पड़ रही थी....हमारा भी मन हो आया खाने का, बारिश के मौसम में कुछ गरमा-गरम खाने का मन करे तो सबसे पहले याद आती है भुट्टों की। बारिश की बूंदों का आनंद लेते हुए गर्म सिके हुए भुट्टों का स्वाद शायद ही किसी को नापसंद हो, ताजा नर्म और गुलाबी पीले भुट्टे बरबस ही मन मोह लेते हैं और अगर उन्हें जब आप सिंकते हुए देखते हैं तो उसकी खुशबू आपको दीवाना बना देती है। नींबू नमक के साथ इनका स्वाद और बढ़ जाता है।

#दिन_ढ़लते_ही ◆【पतंग, जीवन】◆

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मैं छत पर था आज मौसम काफ़ी खुशनुमा था हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी, और आसपास की छतों पर लड़के पतंगे उड़ा रहे थे. उन्ही में से एक पतंग मेरी छत पर आ गिरी. पतंग उड़ाना भी एक कला है जिस कला से मैं वंचित हूँ. अगर पतंग की डोर कच्ची होती हैं, तो जमीं पर आके तुरंत गिर जाती हैं. उसी तरह से मनुष्य के जीवन का डोर भरोसे और उम्मीद के सहारे पर चलता हैं. अगर भरोसा टूट जाता हैं तो उसकी हालत पतंग की तरह हो जाती हैं. इसलिए पतंग यह एक जीवन जीने की कला सिखाता हैं. #_shivvaam_ ✍️ शिवम् ( Shivam Pandit ) Image Clicked by - Me

रिश्तों की समझ, परख

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रिश्ते मानवीय भावनाओं(human emotions) का प्रतीक होते है। एक ओर जहां हमारे जीवन में कुछ रिश्ते खून के होते है वही कुछ रिश्ते भावनाओं से बने होते है जो कभी-कभी खून के रिश्तों से भी ज्यादे जरूरी होते है। रिश्तों के बिना इंसान का जीवन अधूरा हो जायेगा असल में रिश्तों का कोई दायरा नही होता। एक रिश्ता प्रेम तथा विश्वास पर निर्भर होता है, जिसे हम अपने कामों द्वारा सींचते है। यदि हम किसी अंजान व्यक्ति से अच्छा व्यवहार करेंगे तो उसे भी हम अपना दोस्त बना सकते है और अपने रिश्तों को उससे गहरा कर सकते है और इसके विपरीत यदि हम अपने लोगों से भी गलत व्यवहार करेंगे तो हमारे रिश्ते उनसे भी खराब हो जायेगें। इसी वजह से रिश्तों को गहरा बनाये रखने के लिए हमें जिम्मेदारी पूर्वक उनका निर्वहन करना चाहिए। रूठे सुजन मनाइए ज्यों रूठे सौ बार , रहिमन पुनि-पुनि पोहिए जैसे मुक्ताहार| मेरा मानना है की आप अपने मतभेदों और मनभेदों को प्यार व् अपने विवेक का इस्तेमाल करके सुलझाकर रिश्तों को बनाये रख सकते हैं| किसी भी रिश्तें में प्यार होना जरूरी ही नहीं, बहुत जरूरी है और साथ की साथ रिश्तों में एहसास होना भी बहुत ज़रूरी है जो...

मुस्कुराना जरूरी है.❤

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ये बात इस पर है कि आप समस्याओं में भी मुस्कुरा सकते है लेकिन आप मुस्कुराते नहीं है क्यूँकी आप समस्याओं से घिरे हुए है....मुस्कुराइए मुस्कुराना बेहद जरूरी है. प्रिसिद्ध वेब सीरीज "दी फॅमिली मैन" देख रहा था यूँ तो देख चूका हूँ इस बार दूसरी दफा देख रहा हूँ  उसमे श्रीकांत तिवारी के जीवन में कितनी समस्याएं थी ये तो आपने ध्यान ही दिया ही होगा....उसकी पत्नी से उसकी नोक-झोंक होती रहती है...उसका लड़का उसे ब्लैकमेल करता रहता है...बेटी उसका फ़ोन नहीं उठाती. वो परिवार को समय देने के लिए अपनी एजेंट वाली जॉब छोडकर 9-5 कॉर्पोरेट जॉब करना स्टार्ट कर देता है....उसकी लाइफ में इतनी सारी समस्याएं होने के वाबजूद भी उसके चेहरे की मुस्कान नहीं गयी. समस्याएं बड़ी नहीं होती, उन्हें बड़ा हम बनाते हैं. इसलिए समस्याओं को बड़ा नही खुद को बड़ा बनाइये समस्याओं के सामने और उनका मुस्कुरा कर सामना करो. ज़िंदगी है तो दिक्कतें भी आएंगी और इन्ही दिक्कतों का सामना करने के बाद इंसान मजबूत और नए नए अनुभव सीखता है जो जीवन जीने में काफ़ी हद तक मदद करते हैं. हम ज़्यादा कुछ नहीं हो तो फिल्मी दुनिया की कुछ चीज़ें तो असल दुनिया मे...

सूरत और सीरत

सुंदरता सूरत में नहीं सीरत में होती है और सीरत का श्रृंगार , शुद्धता, सरलता, और शीतलता से होता है और सूरत नज़रों का धोखा है, और सीरत जीवन संवारने का मौका है, सूरत तब तक सुंदर है जब तक हम पर नज़र है और सीरत अमर है, सूरत एक दिन खाक में मिल जानी है लेकिन सीरत हमेशा के लिए दिलों में खिल जाती है, इसलिए सूरत को नहीं सीरत को संवारिये और अपनों के दिलों में अपनी जगह बनाइए.. बाकी कान्हा जी देख लेंगे.❤️ ✍️ शिवम् ( #_shivvaam_ )