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सवाल

तुम्हें पता है मैं तुम्हे याद करता हूँ ये बताना पड़ेगा क्या? मैं अभी भी मोहब्बत करता हूँ ये जताना पड़ेगा क्या? बात करने का मन करता है उसके लिए मुझे कॉल या मैसेज करना पड़ेगा क्या? तुम भूली तो नही होगी मुझे ये मुझे पता करना पड़ेगा क्या? वैसे तुम्हें पता है एक उम्र के बाद रिश्ते इज़हार के मोहताज़ नहीं रहते हैं पूछने बताने की ज़रूरत है क्या? फ़िर भी एक सवाल कभी मैसेज करूँ तो, जवाब दोगी क्या? ✍️शिvam😀

#कमबख्त_ख़्याल

क्या होगा? कब होगा? कैसे होगा? इस कशमश में रात गुज़र रही है... हर ख़्वाब... बिखर रहा हैं बस निराशा ही गले लग रही है.. अब तो खुद को, मैं निकम्मा लगता हूँ शायद पर हूँ नहीं, ये में जानता हूँ... कब मेहनत रंग लाएगी, कब किस्मत पलटेगी बस इन्हीं सवालों में... ये बची हुई रात कटेगी... कब तक लोगों में बैठूं झूठी मुस्कान लिए कब तक खुद को.. दिलाशा दिलाऊँ.. मेरे तो कहें लोग शब्द नहीं समझते किसे अपने मन की व्यथा सुनाऊँ... शाम तो दोस्तों में बीत जाती है.... तब ऐसा कोई... ख़्याल नही आता... लेकिन रात के अंधेरे में ये दिमाग से भगाने पर भी नही जाता... ✍️शिवम☺️ © Shivam Pandit   #_shivvaam_

पुराने घर

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आज सोशल मीडिया(instagram) इस्तेमाल कर रहा था तभी एक पोस्ट दिखी जिसमें ये तस्वीर थी और पूछा था कि आपके यहाँ इसे क्या कहते हैं? पुराने घरों में ये सामान रखने का सर्वसुलभ स्थान होता था..अब नए घरों में इसकी जगह ड्रेसिंग टेबल और डिज़ाइनर अलमारियों ने ले ली है। इसको हमारे यहाँ आम भाषा में 'आरो' कहते हैं. जिसे अभी नए मकानों में अलमारी बनाई जाती हैं उसी तरीके से इसके लिए जगह छैक(छोड़) देते थे. अब आप बताइए आपके यहाँ इसे क्या कहते हैं? © Shivam Pandit   #_shivvaam_

स्कूल और यादें

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आज शाम जनरल स्टोर पर गये रतलामी सेव लेने, सेव भाजी खाने का मन था आज वहाँ हमे हमारी प्रिय आलू भुजिया रखी दिखी जिन्हें हम अपने स्कूल के समय में जब हम 11वीं और 12वीं में थे तब अधिकतर खाया करते थे. इसे देखकर खाने का मन हुआ और रतलामी सेव के साथ-साथ एक पैकेट इसका भी ले ही लिया. जब 11वीं और 12वीं में थे तब जब भी क्लास से बाहर जाना होता था या ब्रेक होता था तब हम सबसे पहले सलीम अंकल के पास पहले जाते बाकि जगह बाद में और यूँ मान लीजिये की एक पैकेट और लोग 8 जैसे मंदिर में ठाकुर जी का प्रसाद मिलता है उसी तरीके से हम सब आलू भुजिया खाते किसी को मिल गई तो ठीक वरना एक दुसरे से छीन रहें हैं किसी को बाद में खाली पैकेट दे देते थे. लंच के साथ जब तक आलू भुजिया न खाते तब तक हमारा लंच पूरा सा ही नही लगता था. एक व्यक्ति जाता और आलू भुजिया की एक दर्जन वाली पूरी लाइन गले में माला बनाकर ले आता था और फिर होती थी एक पैकेट पाने के लिए जंग-ए-आलू भुजिया. आज ये देखकर स्कूल, कॉरिडोर, फिजिक्स लैब, क्लासरूम, काल्समेट्स, और आलू भुजिया सब याद आ गये और सबसे ज्यादा टीचर जो पढ़ाने के साथ साथ फील करवा देते थे. उनके समझाने के उदा...

जिंदगी

ज़िन्दगी में कोई अच्छा लगे, भले ही ज़िन्दगी के किसी भी मोड़ पर उसे साथ ले लीजिए, या फिर उसके साथ हो लीजिये, दुनिया से बचकर सही वक्त बिताइए उसके साथ वरना अंत मे एक काश और एक मलाल रह जाएगा साथ.❤️

राधे कृष्ण

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कृष्ण के कई रूप थे...चाहे वो नटखट बालगोपाल हों, माखनचोर हों, मुरलीधर हों, गिरधारी हों, कंस के काल हों, कुरुक्षेत्र में अर्जुन के सारथी हों या फिर गीता के उपदेशक... कृष्ण के बगल में चाहे हमेशा रुक्मणि और सत्यभामा रहीं हों, उनके हृदय में सिर्फ राधा ही बसती हैं...इसीलिए तो जब उद्धव जी जब विद्या को सर्वश्रेष्ठ बता रहे थे और अध्यात्म के गीत गा रहे थे कृष्ण के सामने, तब कृष्ण उन्हें प्रेम समझाने का प्रयास कर रहे थे, और बोले कि 'मोहे बृज बिसरत नाहीं उद्धव भैया'... जब उद्धव जी ने कृष्ण के नेत्रों से झरते हुए आंसू देखे, और पूछा कि ऐसा क्या है खास है प्रेम में; तो कृष्ण ने क्या कहा मालूम नहीं, लेकिन एक गीत है जो शायद कृष्ण का जवाब हो: "ये तो प्रेम की बात है ऊधौ, बंदगी इतनी सस्ती नहीं है... यहाँ दम-दम में होती है पूजा, लौ लगाने की फुर्सत नहीं है" आप में से कइयों ने सुना होगा, जिन्होंने नही सुना; वो कम से कम एक बार जरूर सुनें. आज एक बात महसूस की कान्हा अपने भक्त को कब निराश नही देख सकते. राधा के बिना कृष्ण का कोई मोल नहीं हैं, और राधे-कृष्ण में ही सम्पूर्ण संसार का सार है जो सिर्...

#दिन_ढ़लते_ही

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ये हमें आज डाक द्वारा प्राप्त हुआ. ये दो पेंटिंग्स मेरे लिए बड़े ही प्रेम और स्नेह से बनाई गई हैं. जिन्हें देखकर मुझे बेहद खुशी का अनुभव हो रहा हैं. इन्हें भेजा हैं हमारी शिक्षिका श्रीमती विजयता जादौन की सहकर्मी श्रीमती सुजाता मैम ने हैदराबाद से. आज सुबह सुबह पोस्टमैन भाईसाहब हमें देकर गए..जब से मुझे मालूम हुआ कि ये आने वाला है डाक से तब से ही बेहद उत्साहित और जिज्ञासा हो रही थी आखिर क्या होगा. आज सुबह जैसे ही मिला सारे काम छोड़कर बड़े ही उत्साह से पोस्टमैन के पेपर पर हस्ताक्षर किए और उन्हें सहृदय धन्यवाद कहा और बड़े ही नाजुक और तहरीर से खोला...जैसे जैसे टेप और पैकिंग खुल रही थी उतना ही मैं जिज्ञासा से और भरता जा रहा था.. इन्हें देखकर बहुत ही खुशी हुई और अच्छा भी लगा कि मेरे काम को सराहा गया और उन्होंने न केवल सराहा बल्कि अपने प्रेम से परिपूर्ण मुझे डाक भेजी. इसमें विशेष बात यह है कि मैं और आदर्णीय मैम जिनसे न कभी मुलाक़ात हुई और न ही बात. यह उपहार सदैव मुझे याद रहेगा. मैं इससे ज़्यादा और कुछ नहीं कह पाउँगा, मुझे जो आज महसूस हुआ वह इसके जरिये आपके साथ साँझा कर रहा हूँ मैं श्रीमती विजयता एवं ...